जिन हालात को डाक्टर इसरार साहब रह० अलेय ने तीस साल पहले कहा वो आज सामने हैं...?



सम्पादकीय
"नेशनल न्यूज़ 24 नेटवर्क इंडिया"

लीजिए साहेब एक ओर पेशेनगोई सच साबित होती हुई, आज दुनिया के सबसे बड़े 'सुपरपावर' की बेबसी का तमाशा देखिये...??

पिछले कुछ दिन कहें या हफ़्तों में अमेरिका और इज़राइल ने गिड़गिड़ाते हुए ईरान के पास तीन तरह के समझौते भेजे, लेकिन तेहरान ने हर बार उनके घमंड को मिट्टी में मिलाते हुए एक ही जवाब दिया...

सबसे पहले अमेरिका ने पुरानी शर्तों का एक झुनझुना ईरान को थमाया कि तुम हमें यूरेनियम दे दो, मिसाइलें बनाना छोड़ दो और अपने जांबाजों (Proxies) का साथ छोड़ दो हम हमला नहीं करेंगे...तब ईरान ने इसे कूड़ेदान में डालते हुए जवाब दिया कि ऐसा मुमकिन ही नहीं है तुम जो चाहे करो, मगर जवाब भरपूर मिलेगा याद रखना.

इस जवाब के बाद इज़राइल ने रूस के पैर पकड़कर कहलाया कि "हम हमला नहीं करेंगे, तुम भी मत करना, *"जवाब मिला "हमला हुआ तो इज़राइल नक्शे से साफ़ होगा."*

ओर सबसे मज़ेदार बात तो ये कि अब अमेरिका 'नूरा कुश्ती' यानि (Match Fixing) की भीख मांग रहा है, उसने मैसेज भेजा कि "हमें अपनी नाक बचाने के लिए एक 'लिमिटेड हमला' करने दो, बदले में तुम भी हमारे बेसों को हमें बताकर थोड़ा-बहुत धमाका कर लेना, *"ईरान ने साफ़ कह दिया, ये बच्चों का खेल नहीं है",* इस बार हमला हुआ तो भरपूर और आखिरी जवाब मिलेगा."

तमाम हालात और ख़बरों को अगर सच माने तब सच  यही है कि अब तक जंग किसी की 'शांति की अपील' से नहीं रुकी है, बल्कि उस 'खौफ' से रुकी है जो ईरान ने वाशिंगटन के सीने में पैदा कर दिया है.

अगर अमेरिका को ज़रा भी यकीन होता कि वो तख्तापलट कर लेगा, तो वो न सऊदी की सुनता न तुर्की की, बल्कि वो आज ईरान का हाल इराक़ और सीरिया से भी बुरा करने की पूरी कोशिश करता, मगर ईरान ने साफ़ कर दिया है, अगर हमला हुआ, तो पूरे मिडिल ईस्ट के अमेरिकी ठिकाने मलबे में तब्दील होंगे यहां तक कि सऊदी अरब व क़तर के भी नहीं बख़्शे जायेंगे, इसके बाद पूरी दुनिया तेल के लिए तरस जाएगी, इसे ही कहते हैं असली 'गेम पावर'...

इसके साथ ही हालात को देखकर याद आया अब से करीब तीस साल पहले एक मशहूर आलिम मरहूम जनाब डाक्टर इसरार साहब रह० अलेय ने अपनी एक तक़रीर मैं इसका ज़िक्र करते हुए कहा है कि आगे जो हालात बन रहे हैं उनको संभालने वाला एक ही देश है और वो है ईरान, एक वक़्त ऐसा आयेगा जब ईरान अमेरिका और इज़रायल ही नहीं बल्कि अमेरिका की हिमायत करने वालों को भी सबक़ सिखाने मैं कामयाब होगा, यहां तक कि इज़राइल अपने वजूद के लिए तरसेगा और ऐसा अमेरिका की एक ग़लत कार्यवाही की वजह से होगा...

आपको इस लेख पर क्या कहना है अपनी राय हमें कमैंटस मैं दें शुक्रिया.
सम्पादक "फ़रीद भारतीय"

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