सम्पादकीय 
आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बीते मंगलवार रात व्हाइट हाउस में ईरान के बारे में पत्रकारों से कहा: "वे बातचीत करने को तैयार हैं, हम इस समय उनसे बातचीत कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि बातचीत इस सप्ताह शुरू होगी और साथ ही यह भी कहा, "हमें देखना होगा कि वास्तव में कुछ होता है या नहीं।"

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया: "ईरान के पास पहले भी कुछ करने का मौका था, लेकिन यह सफल नहीं हुआ, और हमें ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम देने के लिए मजबूर होना पड़ा।"

ट्रम्प ने आगे कहा, "मुझे नहीं लगता कि वे ऐसा दोबारा होने देना चाहते हैं और वे अभी भी बातचीत करने को तैयार हैं।"

उन्होंने वार्ताओं के स्थान के बारे में भी कहा: "मैं आपको नहीं बता सकता, लेकिन एक से अधिक बैठकें होंगी।"

बीते सोमवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा: "हम ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं; हम देखेंगे कि अंततः चीजें किस दिशा में जाती हैं।"

उन्होंने अपने विरोधाभासी बयानों को दोहराते हुए कहा, "हमने अभी-अभी ईरान की ओर बड़े जहाज भेजे हैं और हम ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं और हम देखेंगे कि सब कुछ कैसे आगे बढ़ता है।"

ट्रम्प ने दावा किया: "हम ईरान से बात कर रहे हैं, और अगर हम कोई समझौता कर लेते हैं, तो यह बहुत अच्छा होगा; और अगर हम ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो शायद बुरी चीजें होंगी।"

उन्होंने दावा किया: "मैं एक समझौता देखना चाहूंगा। मुझे नहीं पता कि ऐसा होगा या नहीं, लेकिन अगर ऐसा हुआ भी तो मैं आपको नहीं बता पाऊंगा; ऐसा कहना बहुत बेवकूफी होगी।"

वहीं ईरान के इस्लामी गणराज्य के राष्ट्रपति ने 3 फरवरी, 2026 को घोषणा की: "क्षेत्र में मित्र सरकारों के अनुरोध के जवाब में, अमेरिकी राष्ट्रपति के वार्ता के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने के लिए, मैंने विदेश मंत्री को राष्ट्रीय हितों के ढांचे के भीतर निष्पक्ष और न्यायपूर्ण वार्ता के लिए जमीन तैयार करने का आदेश दिया है।"

मसूद पेझाकियान ने एक्स सोशल नेटवर्क पर लिखा: "क्षेत्र में मित्र सरकारों द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति के वार्ता प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने के अनुरोध के मद्देनजर, मैंने विदेश मंत्री को निर्देश दिया है कि यदि धमकियों से मुक्त और अनुचित अपेक्षाओं से दूर एक उपयुक्त वातावरण हो, तो राष्ट्रीय हितों के ढांचे के भीतर गरिमा, बुद्धिमत्ता और उपयुक्तता के सिद्धांतों पर आधारित निष्पक्ष और न्यायसंगत वार्ता के लिए एक आधार प्रदान किया जाए."

और अब आईआरएनए संवाददाता के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची आज सुबह मस्कट हवाई अड्डे पर पहुंचे और देश के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया, इस यात्रा में अराकची के साथ उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई, आर्थिक मामलों के उप विदेश मंत्री हामिद घनबरी और कई ईरानी राजनयिक शामिल हैं.

ईरान के विदेश मंत्री की घोषणा के अनुसार, ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता का नया दौर आज सुबह ओमान की राजधानी मस्कट में आयोजित किया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों की घोषणा के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति के मध्य पूर्व मामलों के विशेष प्रतिनिधि स्टीव व्हिटेकर और डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और सहायक जेरेड कुशनर, अमेरिका की ओर से ईरान के साथ वार्ता का नेतृत्व करेंगे। व्हिटेकर ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आगमन से कुछ घंटे पहले ही मस्कट पहुंच चुके थे.

ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता का यह दौर ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियान और ईरान के खिलाफ़ की जा रही धमकियाँ और दावे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान, अमेरिका के साथ वार्ता की मेज पर बैठते समय वाशिंगटन के साथ हुई पाँच दौर की वार्ताओं के कड़वे अनुभव को ध्यान में रखेगा, जो अंततः इजरायल और अमेरिकी शासनों द्वारा ईरान के परमाणु संयंत्रों पर किए गए सैन्य हमले के कारण रुक गई थीं, इसलिए, विश्वास का मुद्दा इस दौर की वार्ताओं में ईरान के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है, पिछले एक सप्ताह से इन वार्ताओं को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं और यहाँ तक कि बैठक रद्द होने की कगार पर भी आ गई थी.

मगर अब वार्ता होगी, बेशक ये अभी तय नहीं है कि इस बैठक का कोई नतीजा निकेलागा, जो जंग को टाल सके, क्यूंकि इज़राइल नहीं चाहता ईरान को अमेरिका ऐसे ही छोड़ दे, वो ईरान को अपने लिए सबसे बड़ा ख़तरा मानता है, वो तब जब अरब देशों से व्यापारिक दोस्ती मज़बूत कर चुका है, सिर्फ़ ईरान ही है जिसे वो दोस्त नहीं बना सका...

सम्पादक "फ़रीद भारतीय"
नेशनल न्यूज़ 24 नेटवर्क इंडिया
इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसियों के हवाले से ख़बर.

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